All AJ Articles
January 1980
चार आवश्यक सूचनाएँ
प्रगति और विपत्ति में सभी सहभागी
ज्ञान प्राप्ति का मार्ग
तो क्या यह संसार भी झूठ है् !
Quotation
सुन्दर अनुपम सुन्दर यह सृष्टि।
अपना र्स्वग स्वयं ही बनाएँ
दिव्य शक्तियों की उपलब्धि सम्भावना और दर्शन
उपलब्धियों से अधिक महत्वपूर्ण उनका सदुपयोग
जीवन का अन्त या नये जीवन की तैयारी
Quotation
बाह्मजगत अर्न्तजगत का प्रतिबिम्ब
भावनाओं में घुला हुआ विष और अमृत्
सेवा-साधना में जीवन की सार्थकता
सहयोग, सदभाव भरी उदार दिव्य आत्माएँ
सत्प्रयत्न संयुक्त रुप से किए जायें!
संसार केवल मनुष्य के लिये ही नहीं है।
महादेव गोविन्द रानाडे (kahani)
संस्कृति के तीन आधार काय, वाक एवं चित्त संस्कार
अन्वेशी आइजक न्युटन (kahani)
शरीर से पहले मन का उपचार करें!
समू़चे व्यक्तित्व को ही सम्मोहक बनाएँ
Quotation
हरिद्वार कुम्भ पर्व पर प्रगतिशील जातीय सम्मेलनों की धूम
सन 81 के सौर स्फोट और उनका धरती प्रर प्रभाव !
Quotation
निकट भविष्य की अशुभ सम्भावएँ
नियति के परिवर्तन में अघ्यात्म शक्ति का उपयोग
आज में जो जिया सो जिया
आज में जो जिया सो जिया (kavita)
February 1980
कर्म ही सर्वोपरि
गायत्री नगर में देव परिवार बसेगाजागृत आत्माएं उसमें प्रवेश पाने की तैयारी करें
जीवन अनुसंधान
मायापति विष्णु और उनकी योगमाया
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मरण न डरावना है न कष्टदायक
तर्क ही नहीं, श्रद्धा विश्वास भी
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आज मिल पाया नहीं, तो कल मिलेगा
अध्यात्म सिद्धान्त उपयोगी भी और प्रामाणिक भी
प्रत्यक्ष जगत पर अदृश्य जगत का प्रभाव
सर्मथता ही नहीं सहृदता भी
किसी से लुकमान से पूछा (kahani)
वशीकरण एक मन्त्र है.
जीवन साधना की सिद्धि के रहस्य
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कामोल्लास की सृजनात्मक शक्ति
ईरान और टर्की (kahani)
परहित सरिस धर्म नहिभाई ।
दिव्य ध्वनियों के श्रवण की सिद्धि
सज्जनता का परिचय शिष्टाचार से
सच्चरित्रता मानव जीवन की सर्वोपरि सम्पदा
स्वप्नों में निहित आत्मसत्ता के प्रमाण
आहार के त्रिविधि स्तर, त्रिविधि प्रयोजन
Quotation
क्रोध अपने लिए घातक
विशिष्ट प्रयोजन के लिये, विशिष्ट आत्माओं की विशिष्ट खोज
महामानवों के अवतरण की नई पृष्ठभूमि
जन्म समय के आधार पर परिजनों के स्तर का पर्यवेक्षण
कर दो प्रयाण अब प्राणवान ।
कर दो प्रयाण अब प्राणवान (kavita)
March 1980
परिवर्तन में प्रगति और जीवन
युगसन्धि की विषम बेला और जागरुकों का कर्त्तव्य निर्धारण
युग परिवर्तन का यही उपयुक्त समय
मूर्धन्य विश्व विचारकों का अभिमत
अर्न्तग्रही परिस्थितियों की प्रभावी प्रतिक्रिया
मनुष्य जाति पर गहराते संकट के बादल
युद्ध लिप्सा कितनी घातक हो सकती है!
युग-सन्धि का आरम्भ, मध्य और अन्त-प्रसिद्ध ज्योतिर्विदों की दृष्टि में
VigyapanSuchana
सूर्य ग्रहणों की असाधारण श्रृंखला और उनकी अवाँछनीय प्रतिक्रिया
खग्रास ग्रहण से व्यापक उथल पुथल सम्भावित
VigyapanSuchana
सूर्य स्फोटों का अपनी पृथ्वी पर प्रभाव!
विश्व विख्यात कुछ अदृश्य दर्शियों के भविष्य कथन
ईसाई धर्म साहित्य में भावी संकट के संकेत
युग परिवर्तन में अन्तरिक्ष विज्ञान का उपयोग
VigyapanSuchana
आर्ष ज्योतिविज्ञान का पुनजीवन-नई वैद्यशाला
नये चरण इस प्रकार उठाने है।
भावना बल
भावना बल (kavita)
April 1980
प्रगति तो हो, पर उत्कृष्टता की दिशा में
अंधकार अस्थिर, प्रकाश शाश्वत
ईश्वर की सत्ता और महत्ता
आत्मा का अस्तित्व इन्कारा नहीं जा सकता
Quotation
मानवी सत्ता में सन्निहित, महान सम्भावनाएँ
सौर्न्दय बोध, अनुभूति पर आधारित
हमारी उपासना कितनी खरी - कितनी खोटी
मरणोत्तर जीवन की अनुभूतियाँ
अवगति का कारण अभाव नहीं, अनुत्साह
अभिमान का विश्लेषण
विक्षोभ मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता
विलक्षताओं की विभूतियों का भण्डार मनुष्य
जाति, आयु और भोग - त्रिविध कर्म-विपाक
Quotation
परिस्थितियों के साथ मनः स्थिति का ताल-मेल
जीवन परम पुरुषार्थ-मुक्ति
जीव-जन्तुओं में अतीन्द्रिय क्षमता
गायत्री नगर में देव परिवार बसेगा जागृत आत्माओं को निवास आमंत्रण
शेष मंजिल पूरी करने का नया उपक्रम
Quotation
गायत्री नगर-र्स्वग और देवत्व के अवतरण की प्रयोगशाला
Quotation
कौन आवेंगे ? क्या करेंगे ?
यह सौभाग्य हर विवेकवान को मिल सकता है
आत्मोर्त्कष का अलभ्य अवसर
जिन्हें आना हो समय रहते स्वीकृति प्राप्त करें
May 1980
अक्लमन्दी नहीं बुद्धिमत्ता अपनाये।
दो पुण्य प्रयास जो इन्हीं दिनों करने हैं।
आवश्यक अनुरोध
धर्म, विज्ञान और दर्शन का समन्वय
पदार्थ और प्राणियों की सामर्थ्य का उद्गम
Quotation
लो! अब पदार्थ ही मर गया।
समस्त सम्भावनाओं से परिपूर्ण मानवीय व्यक्तित्व
लिंग भेद शाश्वत नहीं, परिवर्तनशील है!
जातस्य हि ध्रुवों मृत्युर्धुवं जन्म मृतस्य च॥
संस्कारों की महत्ता एवं उपयोगिता
अदृश्य का अनुकूलन आवश्यक अपेक्षित
सावधान् स्वर दूषण-त्रिशिरा-मारीच आ रहे हैं
अवरोध पुरुषार्थ के निरीक्षक, परीक्षक
सहकारिता ही उर्त्कष का आधार
विचारों और भावनाओं की शक्ति सामर्थ्य
स्वास्थ्य और शान्ति का शत्रु क्रोध
तीन महान तथ्य-अनुशासन,संयज एवं संरक्षण
गायत्री नगर में देव परिवार
विवेकवान् अपना जीवन दर्शन बदलें
प्रवाह में न बहते रहें, औचित्य भी देखें
प्रभात की पुण्य बेला में आत्म परिवर्तन अपेक्षित....
पुण्यात्मा गृहस्थ के घर एक अतिथि बनकर आये (kahani)
आत्मोर्त्कष और श्रेय साधना स्वर्णिम अवसर
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स्वार्थ और परमार्थ का असाधारण समन्वय
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बालको से भी गये बीते
June 1980
सत् को समझें सत् को पकड़ें
नियति के अन्तराल का सूक्ष्म प्रवेश अध्यात्म
बुद्धिहीन वैज्ञानिक (kahani)
उपासना की मनोवैज्ञानिक पृष्ठ भूमि
स्थूल से असंख्य गुना समर्थ सूक्ष्य
मकरंद एकत्रित करने लगी (kahani)
विश्व शक्ति का उद्गम प्रति पदार्थ और प्रति व्यक्तित्व
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चेतना जगत के अदृश्य संदेश वाहक
मृत्यु-भय का कारण और निवारण
साहूकार ने तिजोरी खोली (kahani)
ब्रहमाण्ड में विद्यमान, विकसित सभ्यताएँ
दो मित्रों (kahani)
अति विलक्षण अचेतन की माया
Quotation
प्रकृति विध्वंस का आयोजन भी करती है
वास्तुकला विशेषज्ञ ये नन्हें प्राणी
अभिवर्धन ही नहीं परिशोधन भी
मस्तिष्क पगलाता क्यों है?
प्रगति के लिए न अधीर हों, न आतुर
परिस्थितियाँ भौतिक, कारण आत्मिक
आत्महीनता की महाव्याधि और उससे छुटकारा
पू. गुरुदेव से भेंट के लिए जुलाई अगस्त ही उपलब्ध गायत्री शक्तिपीठों और व्यक्तिगत परामर्श के लिये इन्हीं दिनों आये
त्रुटि संशोधन
मनौभावों का स्वास्थ्य पर प्रभाव
रोग से ज्यादा रोगी की शत्रु औषधियाँ
कबिरा चिहृ बावरी, ताते नास-बिनास
अपनो से अपनी बात
शक्तिपीठों के लिये कार्यकर्त्ताओं की आवश्यकता
प्रगति-पत्रक
July 1980
तीन असाधारण सौभाग्य
चरणपीठों की स्थापना प्रत्येक गाँव में हो
महामानवों से सम्बद्ध उपकरण
भव-बंधनों से मुक्ति के लिए सम्बन्धों का पुनर्निर्धारण
Quotation
क्या मनुष्य सर्वतः स्वतन्त्र है ?
बुद्धिमान होने के कारण मनुष्य सर्वश्रेष्ठ नहीं है
दैवी प्रकोपों में मानवी दुष्कृत भी सहयोगी
समग्र-सफलताओं का मूलभूत आधार
आत्मिक विकास के लिए स्वप्नों का उपयोग
परावलम्बन, अमरबेल की तरह हेय
सूफी सन्त (kahani)
इच्छित दिशा में जीवधारियों का विकास
क्या मानवी प्रतिमा ध्वस में ही लगनी चाहिये ?
Quotation
अंतरिक्ष के प्रचंड ऊर्जा स्त्रोत
Quotation
जीवन से भागिये नहीं उसे स्वीकार कीजिए
सत्यनिष्ठा के अनुकरणीय प्रसंग
जिनसे मौत भी डर गई
Quotation
अनीति के दूरगामी दुष्परिणाम
प्रकाश की अपराजेयता
वृद्धावस्था शरीर का नही,मन का रोग
आत्मिक प्रगति के तीन सुनिश्चित आधार अवलम्बन
दिव्य अनुदान दिव्य प्रयोजनों के लिए
अब सभी जाग्रत परिजनों को यह लाभ मिलेगा
आत्मश्रेय और देवी अनुग्रह पाने का दुहरा सुयोग
दिव्य अनुदानों का सुयोग सौभाग्य
ध्यानमुद्रा साधक का निजी पुरुषार्थ
अनुदानों का ग्रहण अभ्यास
आदमी की आह
आदमी की आह (kavita)
August 1980
देवत्व पर विजय
यात्रा शून्यनगर से भविष्यनगर की
यह अलभ्य अवसर यों हीन चला जाय
Quotation
कृतज्ञ नहीं, वह मनुष्य नहीं
आत्मिक प्रगति का मूल आधार-श्रद्धा
सारी पृथ्वी साबुन न बन जाये
VigyapanSuchana
संकटों के निराकरण में आस्तिकता का योगदान
अविज्ञात सृष्टि के अविज्ञात रहस्य
प्रकृति का गला न घोट दिया जाय
शरीराणि विहाय जीर्णानि अन्यानि संयाति नवानि देही
तेज आँधी और पानी (kahani)
तात्कालिक नहीं दूरवर्ती हितों को प्रश्रय मिले।
उड़ीसा के दीवान कृष्णच्न्द्र सिंह (kahani)
दोष मत दीजिये “कैच” ठीक करिये
ग्रहों के प्रभाव का लाभ उठायें
वहाँ मूँगफली के छिलके पडे़ हुए हैं (kahani)
यंत्र मानवों की गुलामी के लिए तैयार रहें
शिक्षा का आदर्श क्या होना चाहिए?
परम्पराएँ नहीं उनकी प्रासंगिकता महत्वपूर्ण है
भोजन ही नहीं शोधन भी
तीसरे विश्व युद्ध की सर्वनाशी विभीषिका
रावण दर्बचन बोल रहा था (kahani)
मृत्यु पर्यन्त चिरयुवा कैसे रहे?
राजा विक्रमादित्य (kahani)
वृद्धावस्था अर्थात अमृत-आनन्द
अपनों से अपनी बात - समय की विषमता और जीवन्तों का उत्तरदायित्व
गायत्री चरण पीठे ओर नव सृजन की सम्भावनाएँ
VigyapanSuchana
स्वर गूँजे निर्माण के
स्वर गूँजे निर्माण के (kavita)
September 1980
परिष्कृत जीवन प्रत्यक्ष कल्प वूक्ष
सफलता के लिए समग्र पुरुषार्थ
ईश्वर क्षमा करदे तो भी पाप दण्ड नहीं मिटेगा
युवक रहता था (kahani)
सीस दीयो जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान
श्रद्धावान होने का अर्थ अन्ध श्रद्धा नहीं है
श्रमनिष्ठा और उसकी परिणिति
आँख भी सच कहाँ देखती है
मनोबल ही जीवन शक्ति है
नियंत्रण भावनाओं का भी किया जाय
मस्तिष्क को सृजन प्रयोजनों में लगायें
दूसरों के काम में दिलचस्पी लेना
सामयिक पाँच पुण्य प्रयोजन जो प्रज्ञा पुत्रों को इन्हीं दिनों पूरे करने हैं
प्रकृति द्वारा निद्रा का उपयोग स्वप्न
जो बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए (kahani)
दोष जाने और हटायें बिना स्वयं को शुद्ध न मान लें
प्राकृतिक जीवन जिएँ, निरोग रहें
श्विष्य में मनुष्य कैसा होगा।
जीव-जगत का संकट आगे मनुष्य जाति पर आयेगा
संकट के लिए बचत आवश्यक
अनैतिकता छिपाये नहीं छिपती
बड़प्पन सादगी और शालीनता में है
तृतीय विश्वयुद्ध के गहराते बादल
अपनों से अपनी बात
जीवन साधना
जीवन साधना (kavita)
October 1980
विशिष्ट अनुदान सत्र-स्पष्टीकरण
नवरात्रि साधना-विशेष ज्ञातव्य
परिवर्तन असुविधाजनक होते हुए भी अपरिहार्य हैं
विनाश की विभीषिकाओं का एक मात्र समाधान
युग परिवर्तन की पृष्ठभूमि और आधार
Quotation
युग सन्धि की विषम बेला में जागृत आत्माओं को आह्वान
सह सुयोग गँवा देने वाले पछतायेंगे
Quotation
पवनपुत्र हनुमान का आदर्श अपनाएँ
शालीनता की सीता को ढूढ़ निकाला जाय
जागृतों की अंतरात्मा में इस उषा का उदय इन्ही दिनों
जागृत आत्माओं से अग्रगामी बनने का आहान
यह नवरात्रियाँ असामान्य हैं
नवरात्रि अनुशासन का तत्व दर्शन
नवरात्रि पर्व पर भाव श्रद्धा की परिणति उदार अनुदानों में है
छोटे शुभारंभों में निहित महान संभावनाएँ
युग साधना में निष्ठा का समावेश
भावना के साथ सेवा भावना का समन्वय
चरणपीठों के सम्बन्ध में ज्ञातव्य एवं स्पष्टीकरण
प्रज्ञा संस्थाओं की सफलता के आधार
प्रज्ञापुत्र अपनी प्रौढ़ता का परिचय दें....
नवरात्रि की पूर्णाहुति इस प्रकार सम्पन्न हो
न्यूनतम कार्यक्रम जो सभी प्रज्ञा परिजनों को पूरे करने हैं
जिन्दगी एक पड़ाव नहीं
जिन्दगी एक पड़ाव नहीं (kavita)
November 1980
जीवन एक प्रत्यक्ष कल्प वृक्ष
भूदेव की आराधना
ब्रह्माण्ड में ओत प्रोत ब्रह्म सत्ता
Quotation
सर्व खिल्विद ब्रह्म’ अब अधिक प्रत्यक्ष
सच्चा धन (kahani)
सापेक्षवाद एवं पूर्वाग्रह रहित सन्यान्वेषण
विद्या का सच्चा अधिकारी (kahani)
धर्म तर्क के न्यायालय में
जीवन और मरण की अविच्छिन्न शांखला
कंटीली पगदण्डी (kahani)
त्याग का अन्धानुकरण न किया जाय
मनुष्य और प्रेतों की मध्यवर्ती शांखला
भाग्यवाद पर अन्धविश्वास (kahani)
जीवन की सभी विषमताओं से संघर्ष सम्भव
आपु करे, आपुई फल पावे
Quotation
निंदक नियरे राखिये
समस्त सफलताओं का मूल-मन
अर्न्तमन का परिष्कार, योग साधना से
आत्म-विश्वास से असम्भव कार्य भी सम्भव बन जाते हैं(kahani)
प्रतिमाओं की खेती रक्त-बीज तैयार करेगी
उद्दण्डता नहीं, सौम्य सज्जनता ही श्रेयस्कर
Quotation
हृदय रोग के तीन कारण मानसिक तनाव, शारीरिक बढ़ाव और रक्त का दबाब
Quotation
प्राण शक्ति का, चिकित्सा उपचार में प्रयोग
Quotation
न कहीं संयोग है न कोई सर्वज्ञ
मन की विलक्षण क्षमता
शिक्षा का उद्देश्य व्यक्तित्व का विकास
तोप के गोले जब फूल से कोमल बन गये
शीतऋतु में प्रज्ञापुत्रों के लिए अनुदान सत्र
अपनों से अपनी बात
आत्म-आवरण
आत्म-आवरण (kavita)
December 1980
साधना से सिद्धि और मार्ग के अवरोध
आलोक वितरण हेतु क्षेत्र बढ़ाने में प्रिय परिजनों का सहयोग अपेक्षित
बुद्धं शरणं गच्छामि
चेतना की अविच्छिन्नता एक सर्वस्वीकृत तथ्य
अशरीरी आत्माओं का सहयोग प्राप्त किया जा सकता है
राजकुमार बड़ा ही उद्दण्ड था (kahani)
काम छोटा और बड़ा
शरीर छूट जाने पर भी मोह दुःख देता रहता है
योग्यता अथवा चरित्र
संस्कृति के प्रति गौरव भाव जागृत करें
जहाँ चाह, वहाँ राह
अवतारों की सनातन प्रक्रिया
सुगन्ध की रंग (kahani)
अच्छा बताइये आप क्या और क्यों करते है ?
दया नहीं सहयोग
मनुष्य पराजय के लिए नहीं
प्रसिद्ध कलाकार कृष्णन (kahani)
अतीन्द्रय शक्ति का विकास हर किसी के लिए सम्भव
प्रेम और सद्भावनाओं की शक्ति
प्रिन्स आफ वेल्स हेनरी (kahani)
कर्तव्य की वेदी पर, ममता
कठिनाइयों का स्वागत कीजिए
दूरदर्शिता के सत्परिणाम
पशु सर्वथा पिछड़े ही नहीं हैं
Quotation
सुख और आनन्द की दिशा
आसनों व्यायामों की वैज्ञानिक मान्यता
मधुमक्खी फूल पर बैठी (kahani)
अपनों से अपनी बात
गायत्री-विद्या के अमूल्य ग्रन्थ-रत्न