अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1979-July
बँगला देश के उपद्रवों, आपात्काल स्थिति के निवारण और रजत जयंती वर्ष के महापुरश्चरण इसी श्रेणी में आते हैं जो अप्रत्याशित रूप से सफल रहे। स्काई लैब का संकट सामयिक स्थानीय और छोटा मालूम पड़ता है पर गम्भीरतापूर्वक विचारने पर इसे उस श्रृंखला का सूत्र पात समझा जा सकता है जिसकी ओर भविष्य वक्ता क्रूम हेलर ने संकेत किया था। घटना बड़ी भी है दूरगामी भी। इसलिये उपाय उपचारों की दृष्टि ले अध्यात्म वादियों को भी अपने कर्तव्य पालन करने सुरक्षात्मक प्रयास करने में पीछे नहीं रहना चाहिये
इन दिनों “स्काई लैब” यान का मलवा धरती पर गिरने और भीषण विनाश का संकट आ खड़ा होने की चर्चा जन-जन के मुख पर है। पिछले दिनों अन्तरिक्ष में संव्याप्त शक्तियों और उनकी गति विधियों का पता लगाने के लिये अमेरिका व रूस आदि समृद्ध देशों द्वारा लगभग 1000 उपग्रह भेजे और पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किये गये “स्काई लैब” अमेरिका द्वारा संचालित उन्हीं में से एक है। 85 टन भारी यह यान 1973 छोड़ा गया था
स्मरण रहे सूर्य धब्बों का 11 वर्षीय गति चक्र चलता है और लाखों मील क्षेत्र अपनी भीषण अग्नि ज्वाला में लपेट लेता है। सौर विकिरण की इस लपेट में स्काई लैब भी आ गया और अपनी क्षमता गँवा बैठा, यान की यंत्र-प्रणाली में गड़बड़ भी कारण हो सकती है, बात जो भी हो संकट अति गहरा हो गया है करोड़ों व्यक्तियों के विनाश की विभीषिका उठ खड़ी हुई है
इन दिनों “स्काई लैब” यान का मलवा धरती पर गिरने और भीषण विनाश का संकट आ खड़ा होने की चर्चा जन-जन के मुख पर है। पिछले दिनों अन्तरिक्ष में संव्याप्त शक्तियों और उनकी गति विधियों का पता लगाने के लिये अमेरिका व रूस आदि समृद्ध देशों द्वारा लगभग 1000 उपग्रह भेजे और पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किये गये “स्काई लैब” अमेरिका द्वारा संचालित उन्हीं में से एक है। 85 टन भारी यह यान 1973 छोड़ा गया था। यह पृथ्वी के चारों ओर विषुवत रेखा के 50 अंश उत्तर दक्षिण चक्कर काटता रहा
अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1979-August
तीसरा नया सिलसिला अभी-अभी शुरू हुआ है बारह मंजिली इमारत जितनी विशालकाय और 85 टन भारी एक अन्तरिक्षीय प्रयोगशाला ‘स्काई लैब’ का मलवा जमीन पर गिरने का संकट लोक चिन्ता का विषय बना हुआ है। मलवा गिरने का स्थानीय संकट उतना बड़ा नहीं है जितना कि उसके कारण उत्पन्न हुआ प्रकृति गत असन्तुलन। उल्कापातों का प्रभाव सारे वातावरण पर पड़ता है और दूरगामी दुष्परिणाम उत्पन्न करता है
अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1985-July
इन सब आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए ईश्वर से प्रार्थना यही की जानी चाहिए कि यह विपत्ति भी उसी तरह टल जाय जिस प्रकार कि इन परिस्थितियों में पहले भी “स्काई लैब” जैसी एवं अनेकों विपत्तियाँ, प्रकृति प्रकोप टलते रहे हैं अथवा कम हानि पहुँचाकर ही इतिश्री करते रहे हैं। हर दृष्टि से प्रस्तुत वर्ष एवं आने वाले तीन वर्ष विश्व वसुधा की भविष्य की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे। इन दिनों मानवता को एक नहीं, अनेकानेक विभीषिकाओं का सामना करना पड़ सकता है