Found "अखण्ड दीप" in the following files:
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1991-September - इस प्रकार अखण्ड दीप क की ऊर्जा का आलोक सारे देश भर व विदेश में बैठे प्रवासी परिजनों तक सतत् पहुँचता रहेगा।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1991-August - टोली जिस दिन पहुँचेगी उस दिन सायंकाल सर्वप्रथम पर्व निर्धारित साधना स्थल की स्टेज पर देव साक्षी स्वरूप परम पूज्य गुरुदेव वंदनीय माता जी के चित्र एवं अखण्ड दीप की विधिवत वेदमंत्रों के साथ स्थापना की जायेगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1991-August - अखण्ड जप के समय अखण्ड दीप क प्रज्वलित रखना अनिवार्य रहेगा।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1991-March - अखण्ड दीप क के दर्शन व नमन-वन्दन के पश्चात् संध्याकाल में सभी ने नये बने प्रज्ञा रथों के 100 इंच के पर्दों पर नयी बनी तीन वीडियो फिल्में देखीं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1991-October - स्थापना के पश्चात् यहाँ चौबीस करोड़ गायत्री जप, अखण्ड दीप के सम्मुख कुमारी कन्याओं द्वारा संपन्न किये गए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1991-October - इस अवधि में किसी बंद कोठरी में न बैठकर रोजमर्रा का काम भी करें, स्वतंत्रता संग्राम में भाग लें तथा ज्ञानार्जन कर अखण्ड दीप क जो प्रज्वलित किया है, उसकी ज्योति घर-घर पहुँचाएँ ताकि गायत्री साधना का महत्व जन-जन को समझ में आ सके।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1991-June - चौबीस वर्ष तक जिसके मार्गदर्शन संरक्षण में पूज्य गुरुदेव के महापुरश्चरण संपन्न हुए वह अखण्ड दीप क यहाँ स्थापित है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-November - अब वे कहाँ रहे जहाँ अखण्ड दीप ों की रक्षा की जाती हो।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-November - अखण्ड नियम और अखण्ड दीप क की रक्षा एक ही बात है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-July - वह कोठरी जहाँ पूज्य गुरुदेव ने अपना अखण्ड दीप क रखा वंदनीया माताजी ने जिसकी रक्षा की एवं पूज्यवर ने कठोर तप-साधना की वैसी ही अन्दर से रखकर बाहर से सुरक्षित ढाँचे से ढंक दी गयी है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-July - शाँतिकुँजशाँतिकुँज गायत्रीतीर्थ हरिद्वार अखण्ड दीप परमवन्दनीया माताजी के साथ ही शाँतिकुँज हरिद्वार आ गये जो कि सप्त सरोवर क्षेत्र में उस स्थान पर विनिर्मित किया गया था जहाँ कभी ब्रह्मर्षि विश्वामित्र की तपस्थली थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-July - परमपूज्य गुरुदेव की हिमालय तप साधना की अवधि में ही परमवन्दनीया माताजी के साथ चौबीस कुमारी कन्याओं द्वारा अखण्ड दीप क के समक्ष ख्ब् करोड़ गायत्री मंत्र जप का अनुष्ठान आरंभ कर दिया गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-July - अखण्ड दीप का प्रात ब्राह्ममुहूर्त में दर्शन परखरपरगया सजल श्रद्धा रूपी भव्य स्मारक यहाँ पूज्यवर एवं वंदनीया माताजी के स्थूलशरीर को अग्नि दी गयी थी एवं जिनके स्मृति चिह्न वहीं स्थापित हैं के समीप बैठकर ध्यान शान्तिकुँज की आध्यात्मिक ऊर्जा में स्नान करने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के समान है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-December - 1926 में प्रज्वलित अखण्ड दीप क की ऊर्जा से मार्गदर्शन प्राप्त कर सतत् अपनी ज्योति प्रज्वलित रख प्रकाशित होती आ रही यह पत्रिका इस अंक के साथ अब अपने नये वर्ष में इसमें प्राणऊर्जा का प्रवाह और उद्दात्त व प्रचण्ड वेग के साथ बहता देखा जा सकेगा।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-October - भावनात्मक रूप से हरिद्वार पहुँचने, गंगा स्नान कर, सजल श्रद्धा, प्रखर प्रज्ञा पर नमन, अखण्ड दीप दर्शन, वन्दनीया माताजी से भक्ति और पूज्य गुरुदेव से शक्ति अनुदान पाने का भाव करते हुए सामान्य जप और शक्ति-संचार का ध्यान सम्पन्न कर सकते हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1997-April - यह शृंखला अब पुनः आरंभ करते हैं-इस आश्वासन के साथ कि महाकाल की प्रज्वलित यह ज्योति जो अखण्ड दीप क के प्रकाश से अनुप्राणित है, सत्परामर्श द्वारा लोगों को सत्पथ दिखाने का कार्य अनवरत करती रहेगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-July - हम जानते है कि अखण्ड दीप क की देख-भाल और गोसेवा के लिए आपको बहू की जरूरत है, पर शास्त्र मर्यादा का पालन भी तो होना चाहिए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-November - सभी को यह ज्ञात है कि 1926 ईसवी की बसंत पंचमी (18 जनवरी) की पावन वेला में सूक्ष्मशरीरधारी गुरुसत्ता के निर्देशानुसार एक अखण्ड दीप क प्रज्ज्वलित किया गया था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-November - यह अखण्ड दीप तब से निरंतर जल रहा है एवं विगत तैंतीस वर्षों से गायत्री तीर्थ-शाँतिकुँज में स्थापित है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-November - मिशन के सभी महत्वपूर्ण निर्धारण इस अखण्ड दीप क की साक्षी में ही किए गए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-November - ‘अखण्ड ज्योति’ युगधर्म को महती आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु ही अखण्ड दीप क का एक प्रतीक बनी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-February - गुरुदेवश्री 20 जून को शाम आठ बजे माताजी व अखण्ड दीप क के साथ आए एवं दस दिन बाद सबको सोता छोड़ अज्ञातवास के लिए विदा हो गए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-September - उन्हें छह वर्ष में मिलकर चौबीस लक्ष के चौबीस महापुरश्चरण अखण्ड दीप क की साक्षी में संपन्न करने थे।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-September - फिर ‘ अखण्ड दीप क’ की देखभाल का जिम्मा भी सबसे बड़ा था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-September - 1926 में अखण्ड दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुआ यह संगठन अपनी शतसूत्री युग निर्माण योजना के साथ एक लंबी यात्रा पूरी कर इस मुकाम तक आ पहुँचा है, जहाँ अपने वाले नौ वर्ष विषम परिवर्तनों से भरे हुए हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2003-June - तभी से यह अखण्ड दीप क प्रज्वलित है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1958-May - घी का अखण्ड दीप जैसाकि अखण्ड-ज्योति कार्यालय में जलता है 24 घंटे में प्रायः एक पाव घी खर्च करा देता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-November - परमवंदनीया माताजी जिनने विगत भाद्रपद पूर्णिमा महालय श्रद्धारंभ की पावन बेला में स्थूल शरीर को छोड़कर सूक्ष्म में प्रवेश किया सतत् उस अखण्ड दीप क में घृत बनकर परहित के निमित्त अपनी एक एक बूँद होम करनी रही जो उनकी आराध्य सत्ता ने 1926 में प्रज्वलित किया था व अब भी जल रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-November - उस अखण्ड दीप क को यदि समष्टि के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-November - चौबीस चौबीस कक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण जो परमपूज्य गुरुदेव द्वारा 1926 से 1953 तक के समय में तथा 240 करोड़ जप के कुमारी कन्याओं के अनुष्ठान 1975 तक उस अखण्ड दीप क की उपस्थिति में संपन्न हुए है जिसकी तप ऊर्जा में ही अखण्ड ज्योति के माध्यम से करोड़ों व्यक्तियों तक पहुँचकर उनके व्यक्तित्व को बदला उन्हें परिवार समाज व राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए प्रेरित किया तथा उनके माध्यम से लोकसेवियों का एक बड़ा परिकर खड़ा करके दिखा दिया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-December - न केवल स्थापना हुई है अपितु सन् 1926 से सतत् जल रहे अखण्ड दीप क की स्थापना, कुमारिकाओं द्वारा अखण्ड गायत्री जप, नित्य यज्ञ एवं करोड़ों गायत्री महामंत्र की युगसंधि महापुरश्चरण साधना द्वारा इस क्षेत्र को संस्कारित कर इसे गायत्री तीर्थ के रूप में विकसित भी किया गया है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-October - अखण्ड दीप इस बीच जलता रहा व वंदनीया माताजी की परीक्षा लेता रहा।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-October - परम वंदनीया माताजी को शाँतिकुँज सप्त सरोवर हरिद्वार में अखण्ड दीप क चौबीस-चौबीस लक्ष के चौबीस महापुरश्चरण करने वाली छः कुमारी कन्याएँ व तीन वरिष्ठ कार्यकर्ता गणों के साथ नीरव एकाँत में रहने का निर्देश दे गए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-October - उसी वर्ष आगरा नगर से यमुना पार उसी जिले की एक तहसील एतमादपुर के छोटे से गाँव आँवलखेड़ा नामक ग्राम में जो आगरा-जलेसर मार्ग पर 15 मील की दूरी पर स्थित था, 15 वर्षीया युवा साधक श्रीराम की पूजा कोठरी में दिव्य प्रकाश के ऊर्जा पुँज के रूप में एक सूक्ष्म शरीरधारी गुरुसत्ता का प्रकटीकरण हुआ, जिसने उन्हें उनके पूर्व जन्मों का तथा आगामी जीवन के 65 वर्षों के कार्यकाल का बोध कराके प्राण दीक्षा दी-गायत्री महाविद्या को जन-जन तक पहुँचाने के लिए 24-24 लक्ष के चौबीस वर्ष तक 24 महापुरश्चरण संपन्न करने व अखण्ड दीप क प्रज्ज्वलित कर उस ज्योति के प्रकाश से विश्व-वसुधा के कल्याण के निमित्त स्वयं को तपाने का निर्देश दिया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-October - उनने गायों को जौ खिलाकर गोबर छानकर-उनसे जौ निकालकर उसकी रोटी व छाछ पूज्य गुरुदेव को खिलायी, उनके अखण्ड दीप क की रक्षा की।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1994-October - स्थायी रूप से घर-बार छूट गया-ममत्व देने वाली माँ समान सास जिन्हें “ताईजी” कहते थे, महाप्रयाण कर गयीं, बेटी की शादी हो गयी तो वे अपनी छः गोद ली नन्ही-नन्ही पुत्रियों, जिनसे उन्हें 24-24 लक्ष के 24 महापुरश्चरण अखण्ड दीप क के समक्ष संपन्न कराने थे, को लेकर शाँतिकुँज आ गयीं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1970-December - वे हरिद्वार, ऋषिकेश के बीच सप्त सरोवर के निकट “शान्तिकुँज” नामक साधना कक्ष में हमारी ही तरह अखण्ड दीप क पर 24 लक्ष गायत्री महापुरश्चरणों का क्रम चलावेंगी और उसी उपलब्धि के आधार पर परिवार की सेवा सहायता करने का क्रम पूर्ववत् जारी रखेंगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1977-February - यहाँ अखण्ड दीप क, नित्य जप, नित्य हवन एवं साधनाओं का दिव्य वातावरण बना रहता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1977-December - हमारे व्यक्तिगत जीवन की कुछ प्रमुख और सर्वविदित घटनाएँ इस प्रकार है- (1) 24 वर्ष 24 गायत्री महापुरश्चरणों की कष्ट साध्य तपश्चर्या का श्रीगणेश (2) अखण्ड दीप क की स्थापना (3) अखण्ड-ज्योति पत्रिका का प्रकाशन (4) गायत्री तपोभूमि का शिलान्यास (5) सहस्र कुण्डीय गायत्री यज्ञ से देश भर के अध्यात्म प्रेमियों का एकत्रीकरण (6) गायत्री परिवार की स्थापना (7) वेद शास्त्र आदि आर्ष ग्रन्थों का अनुवाद प्रसारण (8) विचार क्रान्ति अभियान के लिए युग-निर्माण योजना का शत-सूत्री आन्दोलन (9) अज्ञातवास घटनाएँ (10) शान्ति कुँज की स्थापना (11) युगान्तरीय चेतना के लिए सत्र-शिक्षण योजना का आरम्भ (12) महिला जागृति अभियान (13) ब्रह्म वर्चस् आरण्यक (14) अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय का वह प्रयास जिसके आधार पर उज्ज्वल भविष्य की सुनिश्चित सम्भावना है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1977-June - अब भी यहाँ अखण्ड दीप , नित्य यज्ञ, नियमित जप, ब्रह्म सन्दोह, आरण्यक वातावरण की परम्परा का नवीन संस्करण प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया गया है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1969-May - अतएव यह केवल अखण्ड दीप क मात्र ही नहीं रहता वरन अखण्ड यज्ञ बन जाता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1969-March - खाने को फल, शाक, पहनने को दो क्यारी कपास जिसका सूत कात कर तन ढक ले, एक गाय जिससे अखण्ड दीप क को घी मिल जाय और छाछ आहार में प्रयुक्त होती रहें एक कर्मचारी जो पेड़ पौधे और गाय संभालता रहे, रहने को चार कुटियाँ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1974-June - अखण्ड दीप क पर चल रही साधना प्रक्रिया के साथ उसका श्रीगणेश तीन वर्ष पूर्व ही हो गया था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1960-December - नारायण मन्दिर में अखण्ड दीप क भी जलता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1978-October - सेन्ट अमास्टाइन ने अगली संस्मरण पुस्तक में लिखा है कि देवी वीनस के मन्दिर में ऐसा अखण्ड दीप क खुली जगह में जलता था जिस पर वर्षा और तेज हवा का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1984-August - नित्य 24 लाख जप, नौकुण्डीय यज्ञशाला में 24 हजार आहुतियाँ, अखण्ड दीप क आदि कारणों से यहाँ साधना मय विशिष्ट वातावरण है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1984-July - अखण्ड दीप में जो अग्नि सतत् ज्वलनशील रहती है, वह यज्ञाग्नि का ही एक रूप है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-June - युगनिर्माण की प्रक्रिया का बीजारोपण तो 1962 में पूज्यवर की हिमालय यात्रा से लौटने के बाद हुआ, किन्तु गायत्री परिवार के रूप में एक विराट प्रकटीकरण का शुभारम्भ अखण्ड दीप क प्रज्ज्वलन के साथ 1926 में तंग हो चुका था जब परमपूज्य गुरुदेव की अदृश्य मार्गदर्शक सत्ता हिमालय से आकर उनके कक्ष में अवतरित हुई थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-June - तब से सतत् जल रहा-मिशन हर निर्धारण का साक्षी व प्रत्येक के मूल में विद्यमान रहा यह अखण्ड दीप क अपने 75 वर्ष सन् 2001 में युगसंधि महा-पुरश्चरण की अंतिम पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न करने जा रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-June - अखण्ड दीप क की हीरक जयंती के साथ युग-परिवर्तन का एक नया इतिहास लिखा जाएगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-February - वह अपेक्षाकृत अधिक उग्रसाधनाओं में संलग्न हो गये परमपूज्य गुरुदेव भी इसी वर्ष वसन्त पंचमी का अपनी मार्गदर्शक सत्ता के निर्देशानुसार अखण्ड दीप प्रज्वलित कर 24 लाख के 24 गायत्री महापुरश्चरणों की साधना हेतु संकल्पित हुए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-September - १९९. में परमपूज्य गुरुदेव के सूक्ष्म में विलीन हो विराट रूप लेने के बाद संपन्न २७ अश्वमेध महायज्ञ, प्रथम पूर्णाहुति आँवलखेड़ा एवं अभी-अभी न्यूजर्सी (यू. एस. ए.) में सम्पन्न वाजपेय यज्ञ की सफलता के मूल में उसी शक्ति को देखा जा सकता है, जिनसे लाखों - करोड़ों की मनःशक्ति का एकीकरण कर इस ब्रह्माण्ड में एक विलक्षण प्रयोग का बीजारोपण १९२६ में अखण्ड दीप क प्रज्ज्वलन के माध्यम से किया था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-October - यदि इस मिशन का इतिहास जो सन् 1926 से अखण्ड दीप क प्रज्ज्वलन से आरम्भ हुआ उठाकर देखें तो शुरू से अंत साधनात्मक पुरुषार्थों द्वारा सूक्ष्मजगत का क्रुद्ध प्रकृति का सम्भावित विभीषिकाओं का शमन ही इसके मूल में दिखाई पड़ता हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-March - पहले वह प्रारंभिक भाग जहाँ पूज्यवर एवं माताजी का निवास रहा है व आज अखण्ड दीप क स्थापित है, बाद में पीछे का मंदिर व गायत्रीतीर्थ वाला सप्तर्षि क्षेत्र तथा उसके बाद गायत्रीनगर, जहाँ सजल-श्रद्धा, प्रखर-प्रज्ञा सहित सभी शिक्षण भवन व आवास स्थित है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-January - -साधना से सिद्धि-1 वांग्मय क्रमाँक 5 से
हिमालय से अवतरित एक प्रज्ञापुरुष
उपासना-गृह में अखण्ड दीप प्रज्ज्वलित था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-January - सामने अखण्ड दीप क की लव का मन्द-मन्द प्रकाश उपासना गृह की इस छोटी-सी कोठरी में हिमालय का संचार कर रहा था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1998-January - उसी दिन जलाया गया अखण्ड दीप क आज भी सतत् जल रहा- शांतिकुंज से प्रकाश-प्रेरणा दे रहा है एवं उस दिन की बराबर याद दिलाता रहता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1953-January - इसी प्रकार अखण्ड दीप क, अखण्ड जप, अखण्ड पाठ आदि का महत्व बहुत अधिक है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1988-January - जिस प्रकार निराकार भगवान की साकार प्रतिमाएँ बना कर देवस्थानों में प्रतिष्ठित की जाती है, उसी प्रकार यह माना जाना चाहिए कि खण्डित होने वाली-निरन्तर जलने वाली ज्योति के रूप में दृश्यमान अखण्ड दीप क का कलेवर प्रदान किया गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1988-January - शरीर परिवर्तन की बेला आते ही यों तो हमें साकार से निराकार होना पड़ेगा; पर क्षण भर में उस स्थिति से अपने को उबार लेंगे और दृश्यमान प्रतीक के रूप में उसी अखण्ड दीप क की ज्वलन्त ज्योति में समा जायेंगे, जिसके आधार पर अखण्ड-ज्योति नाम से सम्बोधन अपनाया गया है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1988-January - नित्य अखण्ड दीप क के दर्शन।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-April - मैंने उनका प्रकाश के रूप में दर्शन क्रिया शक्ल भी दिखायी पड़ी उसी स्मृति में हमने अखण्ड दीप क जलाये इसलिए कि वह प्रकाश मेरे जीवन में बना रहे जो पहले दिन गुरुदेव ने अपनी शक्ल और सूरत के रूप में हमें दिखायी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-April - कही भूल न जाये कहीं पथ से दूर न हो जाये इसलिए अखण्ड दीप क के रूप में उनकी स्थापना कर दी गयी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-December - यहाँ अखण्ड दीप क जलता रहता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-September - यह मात्र संयोग ही नहीं है कि पंद्रह वर्ष की आयु में उसी वर्ष की आयु में उसी वर्ष वसंत पर्व पर उनके भावी जीवनसाथी- उनके आराध्य एवं गुरु परमपूज्य पं. श्रीराम शर्मा जी ने भी अपने अखण्ड दीप क के प्रज्ज्वलन के माध्यम से अपनी सूक्ष्मशरीरधारी गुरुसत्ता के लगभग 16 मील दूर स्थित आँवलखेड़ा ग्राम में दर्शन किए एवं अपने तीनों जन्मों की जानकारी प्राप्त की थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-February - (1) नव निर्माण अभियान का प्रत्यक्षतः मार्गदर्शन (2) हमारी बौद्धिक एवं सर्वसाधारण को अवगत कराते रहने का माध्यम (3) अखण्ड दीप क एवं गायत्री पुरश्चरणश्रृंखला को गतिशील रखकर कष्ट पीड़ितों की सहायता-यह तीन काम माताजी के जिम्मे हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-June - यहीं पर उनने आर्षग्रन्थों का भाष्य कर उन्हें जन सुलभ बनाया, अपने वजन से भी कई गुना साहित्य रचा एवं नियमित अपनी लेखनी चलाते हुए अपनी साधना के शक्ति स्रोत अखण्ड दीप क के प्रकाश में ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका एकाकी लिखी, जो कि अपनी लम्बी यात्रा पूरी कर पाँच वर्ष पूर्व ही अपनी स्वर्ण जयन्ती मना चुकी है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-June - चौबीस-चौबीस लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण करने, अखण्ड दीप क के प्रकाश में स्वाध्याय जन्म चिन्तन को लिपिबद्ध कर अखण्ड-ज्योति रूपी पत्रिका प्रकाशित किये जाने तथा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के सान्निध्य में जाने, स्वतंत्रता संग्राम के एक सेनानी के नाते सहयोग देने के निर्देश आँवलखेड़ा की इस बस्ती के उनके विशाल घर की छोटी-सी पूजा की कोठरी में ही मिले।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-June - हम सबने उनके नूतन सृष्टि के
सृजन के संकल्प को 1926 की बसंत पंचमी का प्रचलित अखण्ड दीप क के उजाले में साकार होते देखा।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-May - प्रत्येक जप के साथ प्रत्येक माला के साथ प्रत्येक उपकरण के साथ जप कर लिया करूँ जो कर्मकाण्ड मुझे बताया गया उसमें दीपक के रूप में मैंने एक अखण्ड दीप क की स्थापना की।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-May - अखण्ड दीप क जलाया बेशक, लेकिन, साथ-साथ में भावनाओं को भी तदनुरूप बनाया जिस तरीके से अखण्ड दीपक अखण्ड जलता रहता है बुझता नहीं उसी तरीके से हमारा जीवन प्रवाह ज्ञानमय हो, बुझने न पाये, टूटने न पाये श्रृंखला बिगड़ने न पाये।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-May - अखण्ड दीपक जलाया बेशक, लेकिन, साथ-साथ में भावनाओं को भी तदनुरूप बनाया जिस तरीके से अखण्ड दीप क अखण्ड जलता रहता है बुझता नहीं उसी तरीके से हमारा जीवन प्रवाह ज्ञानमय हो, बुझने न पाये, टूटने न पाये श्रृंखला बिगड़ने न पाये।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1995-May - अखण्ड दीप क जलाया गया और वह इम्तहान का दीपक मेरे भीतर और बाहर भी जलता रहा।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1967-February - बन पड़े तो उस दिन घी का अथवा तिल के तेल का अखण्ड दीप क एक दिन के लिये जलाया जाए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1992-February - इसके उपरांत पंद्रह मिनट भावनात्मक रूप से शाँतिकुँज पहुँचकर अखण्ड दीप क का दर्शन करने ,गंगा की गोद , हिमालय की छाया व दैवी संरक्षण में पहुँचकर शक्ति स्रोत से जुड़ने तथा तीनों शरीरों में शक्ति के संचार की ओजस्-तेजस्-वर्चस की वृद्धि की तथा हिमालय की दैवी चेतन प्राण धारा से अनुप्राणित होने की ध्यान-धारणा संपन्न की जाय ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1992-February - इसके पश्चात् शाँतचित्त , स्थिर शरीर, सीधी कमर, दोनों हाथ गोदी में व आँखें बन्द कर मौन गायत्री जप कर मन ही मन शाँतिकुँज पहुँचकर गायत्री तीर्थ गुरुसत्ता एवं अखण्ड दीप क का दर्शन करने, ज्योति किरणों के स्थूल शरीर-मूलाधार चक्र में, सूक्ष्मशरीर आज्ञाचक्र में तथा कारण शरीर हृदय चक्र में संचार होने व साधक के ओजवान , तेजवान , प्रकाशवान बनने व उपलब्ध अमृत वर्षा से पुलकित होकर रस विभोर होने की परिकल्पना की जाय ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1992-June - अखण्ड दीप क का प्रज्ज्वलन, 24 वर्षों तक 24 लक्ष के गायत्री के महापुरश्चरण, अखण्ड-ज्योति पत्रिका के माध्यम से विचार क्रान्ति का, मानव में देवत्व, धरती पर स्वर्ग की प्रक्रिया का बीजारोपण, गायत्री महाविद्या का जन-जन तक विस्तार , यज्ञीय परम्परा का दिक्-दिगन्त में प्रचलन, आर्षसाहित्य का पुनर्जीवन, जीवन जीने की कला संबंधी साहित्य लेखन, धर्मतंत्र से लोकशिक्षण की प्रक्रिया का मार्ग दर्शन, परिव्रज्या परम्परा का पुनर्जीवन, पूर्ण समयदानी लोकसेवियों का उत्पादन हेतु एक टकसाल की स्थापना, सिद्ध तीर्थ-गायत्री तीर्थ का शिलान्यास, विज्ञान व अध्यात्म के समन्वय की शोध हेतु ब्रह्मवर्चस् की शोध प्रक्रिया का शुभारंभ प्रज्ञा संस्थानों के रूप में संस्कार केन्द्रों की चार हजार से अधिक संख्या में भारत भर में स्थापना, विश्वभर में हिन्दू संस्कृति का तत्त्वज्ञान पहुँचाने की प्रक्रिया का शुभारंभ यह सब निर्धारण परोक्ष महाकाल की सत्ता द्वारा किये गए जो समय-समय पर परम पूज्य गुरुदेव को निर्देश रूप में दिये जाते रहे , तदनुसार ही उनके जीवनक्रम का एक-एक मील का पत्थर स्थापित होता चला गया ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1992-August - जहाँ श्रद्धा और सद्भावना है वहाँ अखण्ड अग्नि, अखण्ड धूनी; और अखण्ड दीप क की भी स्थापना रहती है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1992-January - अखण्ड दीप क का प्रज्ज्वलन से लेकर चौबीस महापुरश्चरणोँ का शुभारम्भ, “अखण्ड-ज्योति “ पत्रिका से लेकर गायत्री परिवार की स्थापना, आर्षग्रन्थों के भाष्य से लेकर वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की परिकल्पना तथा युग निर्माण योजना के सूत्रपात से लेकर देश भर में चौबीस सौ प्रज्ञा संस्थानों के निर्माण के संकल्प इसी पावन वेला में लिये गये ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1992-January - इस अवधि में शाँतिकुँज पहुँचने, प्रखर-प्रज्ञा-सजल श्रद्धा का दर्शन कर अखण्ड दीप क का दर्शन तथा वंदनीया माताजी के आशीर्वाद से तीनों शरीरों में शक्ति−संचार का ध्यान करना है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-May - परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी जिन्होंने अखण्ड दीप क से प्रेरणा लेकर ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका पूर्व में 1937 की वसंत पंचमी से आरंभ की, इसे प्रकाशन के रूप में 1940 की वसंत पंचमी से आरंभ की इसे दैवीचेतना का संदेश ही मानते थे।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-May - आगामी वर्ष हमें अखण्ड दीप क की हीरक जयंती के रूप में युगचेतना का अवतरण वर्ष मनाएंगे।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-January - विराट् गायत्री परिवार का जनम हम यों तो सन् 1926 के वसंत पर्व से मानते हैं, जब अखण्ड दीप क के प्रकाश में परमपूज्य गुरुदेव ने अपनी गुरुसत्ता की पहली झलक देखी व मार्गदर्शन पाया था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-January - उन्होंने तीन महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए- 1. अखण्ड दीप क जिसमें से उनका प्रकाश शरीर प्रकटा था, निरंतर प्रज्वलित रखना, अखण्ड यज्ञ के रूप में संचालन किया जाना तथा उसके प्रकाश में ही भविष्य के सभी निर्णय लिए जाना।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-January - इसी ज्योति के ज्ञान शरीर रूप में ‘ अखण्ड दीप क जिसमें से उनका प्रकाश शरीर प्रकटा था, निरंतर प्रज्वलित रखना, अखण्ड यज्ञ के रूप में उसका संचालन किया जाना तथा उसके प्रकाश में ही भविष्य के सभी निर्णय लिए जाना।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-January - संयोग से यह अवधि नवयुग के आगमन के साथ 2001 में अखण्ड दीप क की हीरक जयंती व सारे वर्ष को उसी रूप में मनाने के लिए निर्धारित हो पूरी होने जा रही है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-January - एक अखण्ड दीप क से उपजे प्रकाश ने देवसंस्कृति दिग्विजय में लगे करोड़ों सृजन -शिल्पियों के समुदाय का कैसे एकजुट कर एक विराट् गायत्री परिवार की परिधि में बाँध दिया, यह एक बड़ी मर्मस्पर्शी कथा−गाथा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-June - 1926 में अखण्ड दीप क प्रज्ज्वलन के साथ अपना महापुरश्चरण आरंभ करने से लेकर आँवलखेड़ा गाँव में पारमार्थिक गतिविधियाँ चलाने तथा फिर स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी तक वे अपने पास का सब कुछ न्यौछावर ही करते रहे।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-June - सभी जानते हैं कि ‘ अखण्ड दीप क’ के रूप में युगचेतना नए युग का संदेशा लेकर धरती पर 1923 की वसंत पंचमी 18 जनवरी की ब्रह्ममुहूर्त की पावन वेला में आई।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-July - सभी जानते हैं कि ‘ अखण्ड दीप क’ के रूप में युगचेतना नए युग का संदेशा लेकर धरती पर 1923 की वसंत पंचमी 18 जनवरी की ब्रह्ममुहूर्त की पावन वेला में आई।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-March - अखण्ड दीप , अखण्ड अग्नि जैसे प्रावधानों के पीछे भी यही निहितार्थ है कि उनसे निकलने वाली सूक्ष्म ऊर्जा-तरंगों से लाभान्वित हुआ जा सके ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-March - अखण्ड दीप क की साक्षी में रखे राष्ट्र भर में घूमकर आए, इन कलशों को विराट् विभूति ज्ञानयज्ञ (नई दिल्ली-13 अक्टूबर 2000 जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम) में तथा 6 से 11 नवंबर 2000 को शाँतिकुँज केंद्र में होने वाले 12 वर्षीय युगसंधि महापुरश्चरण के महापूर्णाहुति वर्ष के सृजन संकल्प विभूति महायज्ञ में मंच पर राष्ट्रीय एकता सद्भाव के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाएगा।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - युग वसंत का साक्षी अखण्ड दीप सन् 1926 के वसंत पूर्व प्रज्वलित अखण्ड घृतदीप वसंत पंचमी 2000 पर अपने पिचहत्तरवें वर्ष में प्रवेश कर रहा हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - महाकाल की युग प्रत्यावर्तन प्रक्रिया का साक्षी यह अखण्ड दीप क हमारे आराध्य के आध्यात्मिक जन्मदिवस का ही नहीं, बोध दिवस का ही नहीं, इस विराट् गायत्री परिवार की विकासयात्रा का भी द्योतक हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - परिवर्तन का चक्र यों तो विगत दो सौ वर्षों से सतत् चाल आ रहा हैं, किन्तु एक अखण्ड दीप क ने निरंतर जलकर मानो उस परिवर्तन−प्रक्रिया का पटाक्षेप ही कर डाला एवं हम सभी को नए युग की अगवानी हेतु ला खड़ा किया हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - यह अखण्ड दीप क पहले आँवलखेड़ा (आगरा) में जला, फिर अखण्ड ज्योति-संस्थान, घीयामंडी, मथुरा में एवं अब यह शाँतिकुँज हरिद्वार में विगत 29 वर्षों से सतत् प्रज्ज्वलित हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - इसी अखण्ड दीप क के प्रज्ज्वलन (1923) वाले वर्ष में उनका शरीर से जन्म भी तो निमित्त हुआ था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - इसी अखण्ड दीप क ने ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका को 1937 से आरंभ होकर ज्ञानयज्ञ का प्रकाश लाखों लोगों तक पहुँचाते देखा हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - गायत्री महाविज्ञान की रचना, आर्षग्रंथों का भाष्य एवं युगनिर्माण योजना के सूत्रपात का उद्घोष इस अखण्ड दीप क के प्रज्ज्वलन की वासंती वेला में ही हुआ हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - राष्ट्रीय एकता सम्मेलनों की भारतव्यापी शृंखला के बाद दीपयज्ञों के विराट् आन्दोलनों की घोषणा, क्राँतिधर्मी साहित्य के निर्माण के शुभारंभ के साथ ही बाहर वर्षीय युगसंधि महापुरश्चरण की विधिवत् शुरुआत तथा महाकाल के वासंती संदेश के साथ अपनी स्थूल काया को निर्धारित अवधि में महाप्रयाण द्वारा सूक्ष्म में विलीन करने की घोषणा भी इसी अखण्ड दीप क की साक्षी में हुई हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - अखण्ड दीप क युगपरिवर्तन के इतिहास का, नई सहस्राब्दी के परिवर्तन वेला के आगमन का एवं नवयुग-सतयुग के शुभारंभ का साक्षी हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - महापूर्णाहुति वर्ष की इस वेला में यह विशेषाँक इस अखण्ड दीप क के 75वें वर्ष में प्रवेश के साथ उस गुरुसत्ता के चरणों में समर्पित हैं, जो श्रद्धा एवं प्रज्ञा का समन्वित रूप हैं, जिसने युगपरिवर्तन की पृष्ठभूमि विनिर्मित कर श्रेय लूटने के लिए हम सभी को निमित्त बना दिया है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - आगरा जिले के आंवलखेड़ा गाँव की एक छोटी-सी कोठरी में जलाए गए एक अखण्ड दीप क के माध्यम से हिमालय की ऋषिसत्ता ने सूक्ष्मशरीर से आकर एक नवीन शुभारंभ किया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - ऐसे में जब हम नई ईस्वी-संवत्सर की इक्कीसवीं सदी के मध्यकाल को पारकर हम सं. 2057-2058 में प्रवेश कर रहे हैं, इस महासंक्राँति के महानायक आचार्य श्रीराम शर्मा जी के पुरुषार्थ को ही स्मरण नहीं कर रहे, उनके द्वारा घोषित सतयुग की अगवानी भी प्रस्तुत महापूर्णाहुति वर्ष आगामी हीरक जयंती ( अखण्ड दीप क) वर्ष के माध्यम से करने जा रहे हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - इस अखण्ड दीप के साथ मिशन की कीर्तिमान स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ जुड़ी हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - अखण्ड दीप क अखण्ड यज्ञ का ही स्वरूप हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-February - यही अखण्ड दीप क अब आगे माता जी सुरक्षित रखेंगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-September - यदि अश्वमेध संस्कार महोत्सव इस सौत्रामणी प्रयोग के समान थे, तो अनुयाज रूप में प्रतिभा परिष्कार की सत्र शृंखला चलेगी, जो अनुयाज रूप में 2001 के अखण्ड दीप क एवं युगचेतना के अवतरण के हीरक जयंती वर्ष में सम्पन्न होगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-November - यह भी कहा जा सकता है कि आज से प्रायः 75 वर्ष पूर्व युगचेतना के अभ्युदय, अखण्ड दीप प्रज्ज्वलन के साथ जो संकल्प लिया गया, उसकी महापूर्णाहुति।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2000-April - जैसाकि बताया गया था 19 जून को अंतिम आयोजन के बाद सभी यात्राएँ जन्मभूमि आंवलखेड़ा, गायत्री तपोभूमि अखण्ड ज्योति संस्थान मथुरा होती हुई शांतिकुंज हरिद्वार 16 जून ज्येष्ठ पूर्णिमा की पहुँचेगी व अपने-अपने कलश अखण्ड दीप क की साक्षी में स्थापित करेंगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1955-October - सम्मुख में वृत का अखण्ड दीप जलता रहता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1976-November - ----***----
तपोवनों में प्रकाश उतरा
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तपोवनों में प्रकाश उतरा (kavita)
लगा रहा है, पुकार कोई-नया सबेरा पुकारता है॥ अखण्ड दीप क की, ज्योति जागी,बना दिया है, प्रभात बागी,न काम देगा खुमार कोई-नया उजेला, पुकारता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1965-March - अखण्ड ज्योति संस्थान में ‘ अखण्ड दीप ’ की स्थापना और गायत्री तपोभूमि में ‘अखण्ड अग्नि’ की स्थापना वसन्त पञ्चमी के दिन हुई थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1965-March - ‘ अखण्ड दीप ’ का सम्बल लेकर अपनी निज की गायत्री उपासना करते हुए हमने अपना पथ अधिक सफलतापूर्वक अधिक दूरी तक पार किया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1968-January - गुरुदेव ने इसी दिन दर्शन दिये, जीवन-दर्शन की दिशा मोड़ी, 24 गायत्री महापुरश्चरणों की तपश्चर्या का आरम्भ कराया, अखण्ड दीप क की स्थापना हुई।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-September - इसका चिरसाक्षी 1926 में प्रज्वलित अखण्ड दीप क आज भी अपनी दिव्य आभा बिखेर रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-August - सभी जानते हैं कि अखण्ड दीप क के प्रज्वलन तथा अपनी गुरुसत्ता से वसंत पर्व 1926 की पावन वेला में हुए साक्षात्कार से साधना प्रधान इस गायत्री पर्व का शुभारंभ माना जाता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-August - ’प्रस्तुत वर्ष विशेषहम सभी इस वर्ष प्रखर प्रज्ञारूपी सतत प्रज्वलित अखण्ड अग्नि के रूप में पहले अखण्ड ज्योति संस्थान एवं फिर शाँतिकुँज हरिद्वार में स्थापित’ अखण्ड दीप क के 85 वर्ष पूरे होने पर हीरक जयंती की विशिष्ट साधना का क्रम बना रहे हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-November - इस क्रम में रात्रि में 7.30 घंटे विश्राम, प्रातः 4.15 से 5.15 नित्यकर्म-व्यायाम, प्रातः 6.30 से 8.00 कल्क सेवन (कक्ष में) के बाद मौन- अखण्ड दीप दर्शन, यज्ञशाला में हवन तथा प्रज्ञापेय, 10 से 12 अपराह्न भोजन विश्राम, अपराह्न 3.15 से 4 प्रज्ञापेय का अवकाश तथा 4 से 5 अपराह्न कक्ष स्वच्छता व स्वाध्याय का अवकाश तथा 6.015 सायं से 7 रात्रि तक का समय भोजन के लिए सुरक्षित रखा गया है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-November - ‘ अखण्ड दीप क’ जो 1926 से प्रज्वलित होकर 1972 में शाँतिकुँज आने के बाद से सतत प्रज्वलित है, अपनी हीरक जयंती इस वर्ष मना रहा है तथा परमपूज्य गुरुदेव के प्रखर तप का प्रतीक है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-November - इसी ‘ अखण्ड दीप क’, के, जो अब अखण्ड अग्नि, अखण्ड यज्ञ का स्वरूप ले चुका है, दिव्य प्रभामंडल में ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका का 1938 की वसंत पंचमी को शुभारंभ हुआ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-January - इस कलश यात्रा में पहली बार पूज्यवर द्वारा प्रज्वलित, परमवंदनीया माताजी द्वारा संरक्षित अखण्ड दीप क भी यात्रा की अगवानी करता साथ चला।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-January - एक अखण्ड दीप क के साथ-साथ शक्तिस्वरूपा स्नेहसलिला परमवंदनीया माताजी की जीवनयात्रा के 75 वर्ष भी पूरे होना।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-January - इस कलश यात्रा में पहली बार पूज्यवर द्वारा प्रज्वलित, परमवंदनीया माताजी द्वारा संरक्षित अखण्ड दीप क भी यात्रा की अगवानी करता साथ चला।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-January - एक अखण्ड दीप क के साथ-साथ शक्तिस्वरूपा स्नेहसलिला परमवंदनीया माताजी की जीवनयात्रा के 75 वर्ष भी पूरे होना।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-February - यह परमपूज्य गुरुदेव द्वारा 1926 में प्रज्वलित अखण्ड दीप क, जो अब शाँतिकुँज में स्थित है, के 75वें, वर्ष में प्रवेश वाला वर्ष है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-February - हमारे 75 वर्ष के परिपक्व वयोवृद्ध इस संगठन के प्राणवान् वरिष्ठ कहे जाने वाले प्रज्ञापुत्रों से यह अनुरोध किया जा रहा है कि अब इस वर्ष वे अखण्ड दीप क के सान्निध्य में एक अनुष्ठान से युक्त विशिष्ट सत्र प्रतिवर्ष करते रहने का क्रम बना लें।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-February - यह परमपूज्य गुरुदेव द्वारा 1926 में प्रज्वलित अखण्ड दीप क, जो अब शाँतिकुँज में स्थित है, के 75वें, वर्ष में प्रवेश वाला वर्ष है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-February - हमारे 75 वर्ष के परिपक्व वयोवृद्ध इस संगठन के प्राणवान् वरिष्ठ कहे जाने वाले प्रज्ञापुत्रों से यह अनुरोध किया जा रहा है कि अब इस वर्ष वे अखण्ड दीप क के सान्निध्य में एक अनुष्ठान से युक्त विशिष्ट सत्र प्रतिवर्ष करते रहने का क्रम बना लें।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-May - 1926 से जलते आ रहे इस अखण्ड दीप क ही हीरक जयंती जिसके प्रकाश में गायत्री परिवार जन्मा, एक बीज से वटवृक्ष बना एवं आज चारों ओर छाए घने कुहासे के बीच सभी के लिए एक आशा की किरण की तरह है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - एक छोटा-सा साधारण-सा दीपक अचानक 18 जनवरी 1926 की ब्रह्ममुहूर्त की वेला में एक पंद्रह वर्षीय बालक के लिए अखण्ड दीप क बन गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - सूक्ष्मशरीरधारी परोक्षजगत से पधारी गुरुसत्ता ने उस दिन, उस बोध दिवस के दिन अनायास ही गायत्री परिवार नामक एक संगठन को जन्म दे दिया, जो कि इस वर्ष अपने 75 वर्ष पूरे कर रहा है निरंतर जल रही अखण्ड अग्नि, अखण्ड दीप क की लौ-आभा के साथ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - अब उनसे जुड़ गईं कुमारी कन्याएँ, जिनके साथ उन्हें अखण्ड दीप क की रक्षा करनी थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - अखण्ड ज्योति संस्थान मथुरा से शाँतिकुँज हरिद्वार आए अखण्ड दीप क की साक्षी में पहले दस, फिर सोलह, फिर चौबीस कन्याओं का अखण्ड जप चला।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - धर्मतंत्र के माध्यम से साँस्कृतिक नवोन्मेष की प्रक्रिया को मूर्त रूप दे सके, इसीलिए इस वर्ष को विशेष रूप से परमवंदनीया माताजी के जन्म के साथ युगचेतना के अवतरण, अखण्ड दीप क के प्रज्वलन की हीरक जयंती के रूप में उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - मात्र यज्ञ एवं अखण्ड दीप -दर्शन के लिए 24 घंटे में एक बार बाहर निकलेंगे, वह भी पूर्णतः मौन की स्थिति में।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - महिला जागरण सत्रयह हीरक जयंती परमवंदनीया माताजी की भी है, अखण्ड दीप क की भी, जिसकी साक्षी में करोड़ों का जप संपन्न हो चुका है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - एक छोटा-सा साधारण-सा दीपक अचानक 18 जनवरी 1926 की ब्रह्ममुहूर्त की वेला में एक पंद्रह वर्षीय बालक के लिए अखण्ड दीप क बन गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - सूक्ष्मशरीरधारी परोक्षजगत से पधारी गुरुसत्ता ने उस दिन, उस बोध दिवस के दिन अनायास ही गायत्री परिवार नामक एक संगठन को जन्म दे दिया, जो कि इस वर्ष अपने 75 वर्ष पूरे कर रहा है निरंतर जल रही अखण्ड अग्नि, अखण्ड दीप क की लौ-आभा के साथ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - अब उनसे जुड़ गईं कुमारी कन्याएँ, जिनके साथ उन्हें अखण्ड दीप क की रक्षा करनी थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - अखण्ड ज्योति संस्थान मथुरा से शाँतिकुँज हरिद्वार आए अखण्ड दीप क की साक्षी में पहले दस, फिर सोलह, फिर चौबीस कन्याओं का अखण्ड जप चला।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - धर्मतंत्र के माध्यम से साँस्कृतिक नवोन्मेष की प्रक्रिया को मूर्त रूप दे सके, इसीलिए इस वर्ष को विशेष रूप से परमवंदनीया माताजी के जन्म के साथ युगचेतना के अवतरण, अखण्ड दीप क के प्रज्वलन की हीरक जयंती के रूप में उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - मात्र यज्ञ एवं अखण्ड दीप -दर्शन के लिए 24 घंटे में एक बार बाहर निकलेंगे, वह भी पूर्णतः मौन की स्थिति में।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-March - महिला जागरण सत्रयह हीरक जयंती परमवंदनीया माताजी की भी है, अखण्ड दीप क की भी, जिसकी साक्षी में करोड़ों का जप संपन्न हो चुका है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-December - अतएव वह केवल अखण्ड दीप मात्र ही नहीं रहता वरन् अखण्ड यज्ञ बन जाता है, वहाँ अनायास ही हमें अपनी मनोभूमि उच्चस्तरीय रखने और उस स्थिति के महत्त्वपूर्ण लाभ लेने में सुविधा मिलती है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-December - ’ (अखण्ड ज्योति मई 1961, पृष्ठ 61) उपर्युक्त प्रसंग उस अखण्ड दीप क के विषय में हैं, जो आँवलखेड़ा, आगरा एवं मथुरा के बाद अब शाँतिकुँज हरिद्वार में सतत प्रज्वलित है एवं जिसकी साक्षी में हमारी गुरुसत्ता द्वारा उस प्राणचेतना का आह्वान किया गया, जिसके प्रत्यक्ष स्वरूप के रूप में ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका निकलती है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-December - वस्तुतः अखण्ड दीप क से प्रेरणा लेकर ही 1937-38 में पूज्यवर ने यह विलक्षण नाम इस पत्रिका को दिया था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-December - चौबीस घंटे में मात्र एक बार साधकगण एक साथ कल्क सेवन कर अखण्ड दीप क को प्रणाम करने तथा उनके लिए सुरक्षित यज्ञशाला में यज्ञ संपन्न करने हेतु निकलते हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-December - अखण्ड दीप क की, ज्योति जागी,
बना दिया है, प्रभात बागी,
न काम देगा त्रुमार कोई
नया उजेला, पुकारता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-October - मात्र अखण्ड दीप क−दर्शन एवं यज्ञ के समय वे कक्ष के बाहर निकल सकेंगे।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2001-October - 6.30 से 7.00 कल्कसेवन कक्ष में एवं फिर पंक्तिबद्ध होकर मौन रहकर अखण्ड दीप दर्शन, पृथक यज्ञशाला में यज्ञ तथा फिर कक्ष में प्रज्ञापेय का क्रम है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1957-April - अखण्ड कीर्तन, अखण्ड दीप क, रामायण के नौ परायण, यज्ञ, प्रवचन आदि का कार्यक्रम बनाया गया है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1957-August - इस समय मंदिर में उपासक तथा अन्य व्यक्ति भी एकत्रित होंगे उनसे अखण्ड दीप क के लिए एक-एक रुपया एकत्रित कर लिया जावे।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1957-June - एक छोटा सा कमरा एक ओर गायत्री जी का बड़ा चित्र रखा, अखण्ड दीप क उसके सामने जल रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1957-November - श्री. विष्णुशंकरजी नाजिर ने सवालाख का जप निराहार रहकर तथा अखण्ड दीप जलाकर एक ही स्थान में किया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1985-April - वह अखण्ड दीप क इतने लम्बे समय से बिना किसी व्यवधान के अब तक नियमित जलता रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1985-April - साठ वर्ष से जल रहा अखण्ड दीप क, नौ कुण्ड की यज्ञशाला में नित्य दो घण्टे यज्ञ, दोनों नवरात्रियों में 24-24 लक्ष के गायत्री महापुरश्चरण, साधना आरण्यक में नित्य गायत्री उपासकों द्वारा नियमित अनुष्ठान, इन सब बातों से ऐसा दिव्य वातावरण यहाँ विनिर्मित होता है जैसा मलयागिरि में चन्दन वृक्षों की मनभावन सुगन्ध का।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-December - उत्तर:- निश्चित ही ‘अखण्ड-ज्योति’ पत्रिका पूज्य गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी (1911-1990) तथा परमवंदनीय माताजी (1926-1994) की विचार चेतना के प्रवाह के मार्गदर्शन में ही लिखी जाती हैं ‘ अखण्ड दीप क’ जो शांतिकुंज हरिद्वार में मथुरा से 1971 में आने के बाद से ही प्रज्वलित है, इसकी एवं मिशन की सभी योजनाओं का प्रेरणा स्त्रोत हैं परमपूज्य गुरुदेव ने 1926 में जो अखण्ड दीपक प्रज्वलित किया था वही 1940 से प्रकाशित पत्रिका के ऊर्जा प्रवाह का प्रधान स्त्रोत है एवं आगामी बीस वर्षों में जो भी कुछ लिखा जाना है, उसकी मोटी रूपरेखा पूज्यवर ने महाप्रयाण से पूर्व जनवरी 1990 में बड़े स्पष्ट रूप में लिखकर दे दी थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-December - उत्तर:- निश्चित ही ‘अखण्ड-ज्योति’ पत्रिका पूज्य गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी (1911-1990) तथा परमवंदनीय माताजी (1926-1994) की विचार चेतना के प्रवाह के मार्गदर्शन में ही लिखी जाती हैं ‘अखण्ड दीपक’ जो शांतिकुंज हरिद्वार में मथुरा से 1971 में आने के बाद से ही प्रज्वलित है, इसकी एवं मिशन की सभी योजनाओं का प्रेरणा स्त्रोत हैं परमपूज्य गुरुदेव ने 1926 में जो अखण्ड दीप क प्रज्वलित किया था वही 1940 से प्रकाशित पत्रिका के ऊर्जा प्रवाह का प्रधान स्त्रोत है एवं आगामी बीस वर्षों में जो भी कुछ लिखा जाना है, उसकी मोटी रूपरेखा पूज्यवर ने महाप्रयाण से पूर्व जनवरी 1990 में बड़े स्पष्ट रूप में लिखकर दे दी थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-December - उत्तर:- 1926 से ‘अखण्ड ज्योति’ के रूप में अखण्ड ज्योति’ के रूप में अखण्ड दीप क परमपूज्य गुरुदेव द्वारा प्रज्वलित किया गया था, जिसके माध्यम से वसंत पर्व रूपी उनके आध्यात्मिक जन्मदिवस की बेला में उन्हें उनकी परोक्ष मार्गदर्शन सत्ता ने हिमालय से आकर दर्शन दिए थे एवं साधना सम्बन्धी मार्गदर्शन दिया था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-December - तब से अब तक यही अखण्ड दीप क जल रहा है 1926 से 1941-42 तक यह आंवलखेड़ा व आगरा रहा तथा बाद में 1971 तक ‘अखण्ड ज्योति संस्थान’ मथुरा में ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-December - 1971 की 20 जून से यह अखण्ड दीप क परमवंदनीया माताजी एवं परमपूज्य गुरुदेव के मार्गदर्शन में प्रत्यक्ष रूप से उनकी उपस्थिति में व बाद में उनके परीक्षा संरक्षण में सतत् शांतिकुंज सप्तसरोवर हरिद्वार में जल रहा है, जहां नित्य नियमित रूप से इसको दर्शन प्रणाम करने हेतु हजारों व्यक्ति आते हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-December - यह हुई ‘ अखण्ड दीप क’ की बात ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका इसी तप-साधना के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में प्रथम बार 1937 की वसंत पंचमी से हस्तनिर्मित कागज पर हाथ से चलने वाली मशीनों से निकलने के प्यास द्वारा आरम्भ की गयी थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - एक गाय जिसका घी अखण्ड दीप क के लिए मिल जाए व छाछ आहार में प्रमुख हो ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - इन छोटी-छोटी बालिकाओं के द्वारा वं. माताजी ने न केवल अखण्ड दीप क के समक्ष 24 लक्ष के 24 अनुष्ठान कराये थे बल्कि उन्हें माँ का प्यार देते हुए उन्हें नारी जाग्रति अभियान का सूत्रधार भी बनाया था ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - निश्चित ही नैसर्गिक सौंदर्य से भरे पड़े वातावरण के रूप में शाँतिकुँज का वह मुख्य भवन जिसमें अखण्ड दीप क स्थापित है तथा पीछे का छोटा बगीचा शामिल था ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - गायत्री महाशक्ति की प्रतिमा के समक्ष जल रहे अखण्ड दीप क,जो कि परम पूज्य गुरुदेव द्वारा 1926 में प्रज्ज्वलित किया गया था, के समक्ष दिनभर एवं रात्रि को तीन पातियों में समय विभाजन कर निरंतर जप की व्यवस्था बनाई गयी थी ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - प्रातः उठकर वे अखण्ड दीप क के सामने भजन कर रही बालिका को देखकर आती, अपना दैनंदिन कार्य समाप्त कर स्वयं भी जप में बैठ जाती थी ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - इस बीच गायत्री मंदिर, जो शाँतिकुँज का सबसे पहला मंदिर है जहाँ पर अखण्ड दीप क स्थित है, में जन निरंतर चलता रहता था ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - कभी-कभी अतिरिक्त जप कर वन्द, माताजी अखण्ड दीप क का दायित्व किसी एक बालिका या शारदा देवी के जिम्मे छोड़ बालिकाओं को हरिद्वार घुमाने अथवा संत सरोवर के गंगा तट पर ले जाने का क्रम भी बनाए रखती थी ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - अखण्ड दीप क के आलोक में अनगिनत प्रेरणाएँ उनके अर्न्तगगन में उतरी थीं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - परिजन हम लोगों का संयुक्त जीवन अखण्ड दीप क का प्रतीक मानकर उसे आत्मसत्ता की साकार प्रतिमा मानते रहें।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-August - ”शरीर परिवर्तन की बेला आते ही यों तो हमें साकार से निराकार होना पड़ेगा, पर क्षणभर में उस स्थिति से अपने को उबार लेंगे और दृश्यमान प्रतीक के रूप में उसी अखण्ड दीप क का ज्वलन्त ज्योति में समा जाएँगे जिसके आधार पर अखण्ड ज्योति नाम से सम्बोधन अपनाया गया है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-March - तत्पश्चात् दिव्य औषधि कल्क सेवन अखण्ड दीप क व गुरुसत्ता की पादुकाओं को नमन का क्रम चलेगा।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1996-July - तपोभूमि में विभिन्न शिविरों का आयोजन किया जाता रहा, पूज्यवर स्वयं छोटे-बड़े सम्मेलनों युवा योजनाओं के द्वारा विचार-क्रान्ति की पृष्ठभूमि बनाते रहे पूरे देश में 1970-71 में पाँच 1008 कुण्डी यज्ञ आयोजित कर स्थायी रूप से विदाई लेते हुए एक विराट सम्मेलन (जून 1971) में परिजनों को विशेष कार्यभार सौंप परम वंदनीया माताजी को शांतिकुंज हरिद्वार में अखण्ड दीप के समक्ष तप हेतु छोड़कर स्वयं हिमालय चले गए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-March - शान्तिकुँज में गोघृत के अखण्ड दीप क पर अखण्ड गायत्री जप के 24 गायत्री महापुरश्चरणों की एक शृंखला चल रही है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-March - अखण्ड जप और कन्यायेंशान्तिकुँज में अखण्ड दीप क पर 24 गायत्री महापुरश्चरणों की शृंखला अखण्ड जब के रूप में चल रही है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-May - कुमारी कन्याओं द्वारा शान्ति कुञ्ज में अखण्ड दीप क पर अखण्ड जप ही इन दिनों अपना एक मात्र उपार्जन है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-May - अखण्ड दीप क अपना 46 वर्ष पूर्व से ही जलता चला आ रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-May - इसी तथ्य को ध्यान में रखकर शान्ति-कुञ्ज में संकल्पित 24 लक्ष गायत्री महापुरश्चरण 24 की संख्या में अखण्ड दीप क पर अखण्ड जप के रूप में सम्पन्न करने का जो निश्चय किया गया उसके लिए कन्याएं ही उपयुक्त माध्यम चुनी गईं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-November - उसी प्रकार अखण्ड दीप क पर अखण्ड गायत्री महापुरश्चरण कुमारी कन्याओं के माध्यम से यहाँ भी सम्पन्न किये जा रहे हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-November - इन दिनों कन्याओं को अखण्ड दीप क पर तप साधना इसलिए भी कराई जा रही है कि अगले दिनों अवतरित होने वाली- महान आत्माओं का तेज वे अपने गर्भ में धारण कर सकें।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-November - शान्ति-कुञ्ज का अखण्ड दीप क पर चलने वाला महा पुरश्चरण जहाँ युग-निर्माण परिवार के सदस्यों की कितनी ही कठिनाईयों को हल करने की शक्ति उत्पन्न कर रहा है, वहाँ कन्याओं की शिक्षा के अतिरिक्त उनमें उत्कृष्ट स्तर की क्षमता भी उत्पन्न कर रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-April - अखण्ड दीप क पर कुमारी कन्याओं के माध्यम से शान्तिकुँज में जो अखण्ड गायत्री जप-24 लक्ष के 24 महापुरश्चरणों के निमित्त चल रहा है, उसके अतिरिक्त अपनी उपासना थोड़ी सी ही हो पाती है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-August - शान्तिकुञ्ज (हरिद्वार) में कुमारी कन्याओं द्वारा अखण्ड दीप क पर अखण्ड गायत्री जप कराया जा रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1972-August - अखण्ड दीप क पर पुरश्चरणों की शृंखला सम्पन्न करते हुए उन्होंने भावना क्षेत्र में यह निष्ठा परिपक्व की कि जीवन को ज्वलन्त दीप शिखा की तरह अन्तरंग एवं बहिरंग क्षेत्र में प्रकाश उत्पन्न करने के लिये तिल-तिलकर जलते रहने की प्रक्रिया व्यवहार में लाई जानी चाहिये यदि दीप उपकरण के साथ-साथ वे आत्म-ज्योति को प्रकाशवान बनाने का लक्ष्य सामने रखकर न चले होते तो उनकी अखण्ड-ज्योति भी मात्र रोशनी पैदा करने का तुच्छ सा प्रयोजन पूरा कर सकी होती।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1982-September - जहाँ श्रद्धा और सद्भावना है वहाँ अखण्ड अग्नि, अखण्ड धूनी, अखण्ड दीप क की भी स्थापना रहती है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1982-May - चित्र तीर्थों की तरह हिमालय और गंगा का अद्भुत देवालय भी यहाँ प्रतिष्ठित है अखण्ड दीप क, अखण्ड अग्नि, नित्य का यज्ञ, वर्ष में 24 करोड़ जप का संकल्प, गायत्री में रहने से पुरातन काल की तीर्थ परम्परा की छोटी किन्तु प्रभावी झाँकी उपलब्ध होती है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1982-November - अखण्ड दीप क के दर्शन, औषधि कल्पपेय की एक प्याली, प्रज्ञापेय का एक कप-इतना प्रसाद ग्रहण करने के इस कृत्य में प्रायः आधा घण्टा लग जाता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1952-May - उस दिन घी का अखण्ड दीप क जलाया जाय।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1963-January - इस तरह जिसके हृदय में प्रेम का अखण्ड दीप जलता रहे, वस्तुतः वही सच्चा प्रेमी है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1963-January - इस तरह जिसके हृदय में प्रेम का अखण्ड दीप जलता रहे, वस्तुतः वही सच्चा प्रेमी है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1975-March - 20 जून 71 को मथुरा छोड़कर जब हम लोग हरिद्वार आये तो शान्ति कुंज का उद्घाटन अखण्ड दीप क पर कन्याओं द्वारा महापुरश्चरण के रूप में आरम्भ किया गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1959-November - आचार्यजी चाहते हैं कि उनकी 30 वर्ष की कमाई का प्रतीक अखण्ड दीप क अभी 10 साल और जलता रखा जाय और 40 वर्ष का जो दीप अनुष्ठान होता है वह पूर्ण किया जाय।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1959-November - उसी प्रकार अखण्ड दीप क के आगे भी उसका भोजन कम से कम 60 माला जप नित्य होना आवश्यक है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1959-November - अखण्ड ज्योति कार्यालय में जो अखण्ड दीप जलता है उसके सम्मुख हम दोनों मिलकर कम से कम 60 माला जप अवश्य कर लेते हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1959-November - इसके लिए उनने अखण्ड दीप के आगे अखण्ड जप का आयोजन किया है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1959-October - (3) अखण्ड दीप और अखण्ड जप जहाँ रहे वहाँ के संस्कार लेकर ही ‘अखण्ड ज्योति’ निकले।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1959-October - और दश वर्ष में 24-24 लक्ष के 24 महापुरश्चरण इसी अखण्ड दीप क की छाया में पूरे करने में संलग्न रहूँगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1959-October - यह पंक्तियाँ लिखते समय अखण्ड दीप और अखण्ड-जप वाली दोनों प्रक्रियाएं उतनी कठिन नहीं मालूम हो रही हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-December - उन्होंने अपनी 24 वर्षीय गायत्री पुरश्चरण साधना अखण्ड दीप क पर उसी दिन आरम्भ की थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-May - (1) नवनिर्माण अभियान का प्रत्यक्ष मार्ग-दर्शन, नीति निर्धारण,(2) हमारी बौद्धिक एवं साधनात्मक उपलब्धियों से सर्वसाधारण को अवगत कराते रहने का माध्यम और(3) अखण्ड दीप क एवं गायत्री पुरश्चरण श्रृंखला को गतिशील रखकर कष्टपीड़ितों की सहायता एवं परिजनों को प्यार - प्रकाश का अनुदान।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-February - उस अवधि में सब कुछ सामान्य चला, असामान्य एक ही था- हमारा गौ घृत से अहर्निश जलने वाला अखण्ड दीप क।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-February - अखण्ड दीप क की साधना कक्ष में स्थापना भी इसी प्रक्रिया के अंतर्गत आती है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-February - जो साधना हमें बताई गई उसमें अखण्ड दीप क का महत्व है इतना बता देने पर उसकी स्थापना कर ली गई और पूरी अवधि तक उसे ठीक तरह जलाये रखा गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-February - यदि एकाकी रहे होते पत्नी न होती तो और कुछ साधना बन सकती थी अखण्ड दीप क संजोये रखना कठिन था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-February - अखण्ड दीप क स्थापित करने वालो में से अनेकों के जलते बुझते रहते हैं, वे नाम मात्र के ही अखण्ड है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-February - हो सकता है अखण्ड दीप क अखण्ड यज्ञ का स्वरूप हो।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1971-February - शरीर, मन और आत्मा में- स्थूल सूक्ष्म और कारण कलेवर में हम जिस ज्योतिर्मयता का ध्यान करते रहे हैं सम्भवतः वह इस अखण्ड दीप क की ही प्रतिक्रिया रही होगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1999-June - इसी का साकार स्वरूप है 'अखण्ड ज्योति' जिस प्रकार निराकार भगवान की साकार प्रतिमाएँ बनाकर देवस्थानों में प्रतिष्ठित की जाती है, उसी प्रकार यह मन जाना चाहिए की खंडित न होने वाली निरंतर जलने वाली ज्योति के रूप में दृश्यमान अखण्ड दीप क को कलेवर प्रदान किया गया अखण्ड ज्योति के रूप में।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1999-January - प्राचीनकाल में ऐसे अनेक अखण्ड दीप कों के प्रमाण मिले है, जो सैकड़ों वर्षों से जलते आ रहे थे।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1999-September - यह मात्र संयोग ही नहीं है कि पंद्रह वर्ष की आयु में उसी वर्ष की आयु में उसी वर्ष संवत् पर्व पर उनके भावी जीवनसाथी- उनके आराध्य एवं गुरु परमपूज्य पं. श्रीराम शर्मा जी ने भी अपने अखण्ड दीप क के प्रज्ज्वलन के माध्यम से अपनी सूक्ष्मशरीरधारी गुरुसत्ता के लगभग १६ मील दूर स्थित आँवलखेड़ा ग्राम में दर्शन किए एवं अपने तीनों जन्मों की जानकारी प्राप्त की थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1999-September - यह मात्र संयोग ही नहीं है कि पंद्रह वर्ष की आयु में उसी वर्ष की आयु में उसी वर्ष संवत् पर्व पर उनके भावी जीवनसाथी- उनके आराध्य एवं गुरु परमपूज्य पं. श्रीराम शर्मा जी ने भी अपने अखण्ड दीप क के प्रज्ज्वलन के माध्यम से अपनी सूक्ष्मशरीरधारी गुरुसत्ता के लगभग १६ मील दूर स्थित आँवलखेड़ा ग्राम में दर्शन किए एवं अपने तीनों जन्मों की जानकारी प्राप्त की थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1999-March - इसी तरह परमपूज्य गुरुदेव के आँवलखेड़ा स्थित साधना कक्ष में जल रहे अखण्ड दीप क से 1926 की वसंत पंचमी के पावन दिन उनकी सूक्ष्म शरीरधारी गुरुसत्ता का प्रकट होना-उन्हें दैवी संदेश मिलना-अखण्ड ज्योति’ पत्रिका के द्वारा उत्कृष्टता के विस्तार हेतु एक नयी क्राँतिकारी शुरुआत होना-गायत्री तपोभूमि की स्थापना के माध्यम से चौबीस लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरणों की श्रृंखला की पूर्णाहुति होना तथा 1958 में आयोजित सहस्रकुण्डीय गायत्री महायज्ञ के माध्यम से बंधन मुक्त गायत्री व यज्ञ विधा का चतुर्दिक् विस्तार हो एक विराट गायत्री परिवार बनना-प्रज्ञावतार के क्रिया-कलापों का प्रायः चालीस वर्षों में फैलना एक लेखा-जोखा कहा जा सकता है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1999-December - अखण्ड ज्योति प्रतीक रूप में स्थापना है- खंडित न होने वाले, निरंतर जलने वाली ज्योति के रूप में दृश्यमान ‘ अखण्ड दीप क’ के कलेवर की, जिसकी स्थापना 1926 में एक अखण्ड यज्ञ के रूप में की गई थी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1999-December - तब से सतत् जल रहा यह अखण्ड दीप क शान्तिकुञ्ज हरिद्वार में सतत् जाज्वल्यमान रह आगामी वर्ष अपने 75 वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1999-December - जिस प्रयोजन से अखण्ड दीप क के समक्ष चौबीस लक्ष के चौबीस महापुरश्चरणों की श्रृंखला आरंभ की गई थी वह था विश्वमानव की वर्तमान चिंतन चेतना को उलटकर सीधा करना।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-April - महापूर्णाहुति के सफल-सुव्यवस्थित आयोजन के तुरंत बाद हीरक जयंती वर्ष आ गया, जिसे त्रिविध रूप में युग चेतना के अभ्युदय (भगवत् सत्ता के धरती पर अवतरण), अखण्ड दीप रूप में प्रखर प्रज्ञा के निरंतर प्रकाशित होते रहने तथा परमवंदनीया माताजी के जन्म के 75 वें वर्ष पूरे होने के साथ सजल श्रद्धा के अनवरत अनुदान बरसने की प्रक्रिया रूप में संपन्न किया गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-July - सूदरलैंड दंपत्ति ने अखण्ड दीप क के दर्शन कर गुरुसत्ता का प्रतिनिधियों से मुलाकात भी की।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-May - 1926 में अखण्ड दीप प्रज्वलन से लेकर 1958 में एक विराट् वाजपेय स्तर के 1008 कुंडी गायत्री महायज्ञ द्वारा मथुरा से गायत्री परिवार के निर्माण तक वे ‘ एकोऽहं बहुस्यामि’ की उक्ति के अनुसार बहुगुणित होते चले गए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-May - परमवंदनीया माताजी का कठोर तप, साथ में देवकन्याओं द्वारा अखण्ड दीप के समक्ष किया गया जप क्रमशः फलित हुआ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-December - यह वस्तुतः इसी अखण्ड दीप की साक्षी में गुरुसत्ता की प्राण चेतना के रूप में हमारे समक्ष आती है, जो विगत 1926 से सतत प्रज्वलित है एवं इन दिनों शाँतिकुँज गायत्री तीर्थ में प्रकाशित हो करोड़ों व्यक्तियों को आलोकित कर रहा है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-October - मूर्ति स्थापना कार्यक्रम व महत्वपूर्ण निर्देशपरमपूज्य गुरुदेव के सदैव यही निर्देश रहे कि उनकी सत्ता सजल−श्रद्धा प्रखर−प्रज्ञा के रूप में, देवात्मा हिमालय व स्मृति उपवन के रूप में, अखण्ड दीप क की जाज्वल्यमान ज्योति के रूप में तथा उनके द्वारा लिखे गए विचारों के रूप में, उनके साहित्य में ही सदा मौजूद रहेगी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-March - वर्ष 1926 ई. की बसन्त पंचमी को हिमालय वासी परमगुरु के दिव्य सान्निध्य में जो अखण्ड दीप जला, उसकी ज्योति दो स्थानों पर एक साथ प्रकट हुई और अखण्ड बनी।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-March - अखण्ड दीप की अखण्ड ज्योति का एक प्राकट्य गुरुदेव की पूजा स्थली पर हुआ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-March - यह दिव्य निर्देश अखण्ड दीप की अखण्ड ज्योति के सान्निध्य में ध्यानस्थ, साधनारत गुरुदेव की आत्मा में प्रकाशित हो रही अखण्ड ज्योति में अवतरित हुआ।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-September - साथ में वर्षों की तप-साधना से सिद्ध अखण्ड दीप क को सम्हाले हुए दो-तीन कार्यकर्त्ता थे।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-September - जहाँ आज अखण्ड दीप स्थापित है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 2002-September - ये बालिकाएँ उनके निर्देशन में अपने दैनिक काम-काज के अलावा अखण्ड दीप की सिद्ध ज्योति के सान्निध्य में साधना करती थीं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - “ अखण्ड दीप क ही समय-समय पर पर परोक्ष जगत से आने वाले दैवी मार्गदर्शन को तुम तक पहुँचायेगा, अतः जहाँ भी रखो, इसे अपने पास पूजा गृह में रखना।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - पहले यह अखण्ड दीप क मात्र 24 पुरश्चरणों के लिए था पर अब कार्य पूरा हो जाने पर भी उसका विसर्जन नहीं होना चाहिए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - तीसरा निर्देश था कि अखण्ड दीप और अखण्ड जप जहाँ रहें वहीं के संस्कार लेकर ही “अखण्ड-ज्योति “पत्रिका प्रकाशित हो।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - इस लेख में जहाँ से शुरुआत की गई थी, इसी प्रसंग को आगे बढ़ाने हैं कि जन सामान्य अनुकरण की प्रवृत्ति अपनाते हुए सारी सिद्धि का स्रोत एक दृश्य उपचार को मानते हुए अखण्ड दीप क या अग्नि प्रज्ज्वलित तो कर देते हैं पर उसका निर्वाह नहीं कर पाते।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - यही कार्य पूज्य गुरुदेव व वंदनीया माता जी ने किया तथा आज भी वह अखण्ड दीप क जो 64 वर्षों से जल रहा है, शांतिकुंज में स्थापित है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - प्रस्तुत पंक्तियाँ भी उसी अखण्ड दीप क के प्रकाश में परोक्ष प्रेरणा से लिखी जा रही है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - यहाँ यह सब विस्तार से इसलिए लिखा गया है कि जो परिजन उस अखण्ड दीप क के दर्शन यहाँ आकर करते है, उसके मूलभूत तत्वदर्शन व परोक्ष सिद्धि के स्वरूप में भी समझें।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - यदि यह न बन पड़े जो कि असंभव ही है क्योंकि दीप जलाने के साथ जो तप साधना जुड़ी है, वह भी स्वयं की, वह कर पाना हरेक के लिए शक्य नहीं है, तो उस अखण्ड दीप व अखण्ड-ज्योति से लाभ उठायें जो क्रमशः प्रत्यक्ष अग्नि व लेखनी रूपी संजीवनी के रूप में उनके समक्ष प्रस्तुत है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - इनने अखण्ड दीप के पास अखण्ड महापुरश्चरण वंदनीया माताजी के मार्गदर्शन में आरंभ कर दिया जो चार वर्ष में समाप्त हो गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - वे तथा वंदनीया माताजी एवं उनका अखण्ड दीप क शाँतिकुँज आ गए, जो अभी बनकर मात्र रहने योग्य स्थिति में ही था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-September - गुरुदेव ने अखण्ड दीप क के पास ले जाकर कहा मेरी “अखण्ड-ज्योति” यह है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-April - गंगा की गोद, हिमालय की छाया, सप्तऋषियों की तपोभूमि दिव्य वातावरण और अखण्ड दीप प्रज्ज्वलन, नित्य यज्ञ, युगसन्धि महापुरश्चरण की आधारशिला के साथ-साथ वहाँ अनायास ही ऐसा शिक्षण तंत्र बन गया है, जिसे चंदनवन, नन्दनवन की उपमा दी जा सकती है और कहा जा सकता है कि उसमें प्रवेश करने वाला जब लौटता है तो उसकी स्थिति ऐसे कायाकल्प जैसी हो जाती है, जिसकी तुलना वयोवृद्ध च्यवन का अश्विनी कुमारों के अनुग्रह से तरुण हो जाने से की जा सकती हैं।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-December - स्थूल सूक्ष्म व कारण शरीर के परिष्कार के लिए जड़ी बूटी कल्क अखण्ड दीप क को प्रणाम करते समय दिए जाने की व्यवस्था की गयी है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - “ अखण्ड दीप क ही समय-समय पर पर परोक्ष जगत से आने वाले दैवी मार्गदर्शन को तुम तक पहुँचायेगा, अतः जहाँ भी रखो, इसे अपने पास पूजा गृह में रखना।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - पहले यह अखण्ड दीप क मात्र 24 पुरश्चरणों के लिए था पर अब कार्य पूरा हो जाने पर भी उसका विसर्जन नहीं होना चाहिए।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - तीसरा निर्देश था कि अखण्ड दीप और अखण्ड जप जहाँ रहें वहीं के संस्कार लेकर ही “अखण्ड-ज्योति “पत्रिका प्रकाशित हो।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - इस लेख में जहाँ से शुरुआत की गई थी, इसी प्रसंग को आगे बढ़ाने हैं कि जन सामान्य अनुकरण की प्रवृत्ति अपनाते हुए सारी सिद्धि का स्रोत एक दृश्य उपचार को मानते हुए अखण्ड दीप क या अग्नि प्रज्ज्वलित तो कर देते हैं पर उसका निर्वाह नहीं कर पाते।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - यही कार्य पूज्य गुरुदेव व वंदनीया माता जी ने किया तथा आज भी वह अखण्ड दीप क जो 64 वर्षों से जल रहा है, शांतिकुंज में स्थापित है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - प्रस्तुत पंक्तियाँ भी उसी अखण्ड दीप क के प्रकाश में परोक्ष प्रेरणा से लिखी जा रही है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - यहाँ यह सब विस्तार से इसलिए लिखा गया है कि जो परिजन उस अखण्ड दीप क के दर्शन यहाँ आकर करते है, उसके मूलभूत तत्वदर्शन व परोक्ष सिद्धि के स्वरूप में भी समझें।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - यदि यह न बन पड़े जो कि असंभव ही है क्योंकि दीप जलाने के साथ जो तप साधना जुड़ी है, वह भी स्वयं की, वह कर पाना हरेक के लिए शक्य नहीं है, तो उस अखण्ड दीप व अखण्ड-ज्योति से लाभ उठायें जो क्रमशः प्रत्यक्ष अग्नि व लेखनी रूपी संजीवनी के रूप में उनके समक्ष प्रस्तुत है।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - इनने अखण्ड दीप के पास अखण्ड महापुरश्चरण वंदनीया माताजी के मार्गदर्शन में आरंभ कर दिया जो चार वर्ष में समाप्त हो गया।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - वे तथा वंदनीया माताजी एवं उनका अखण्ड दीप क शाँतिकुँज आ गए, जो अभी बनकर मात्र रहने योग्य स्थिति में ही था।
- अखण्ड ज्योति वर्ष-महीना 1990-August - गुरुदेव ने अखण्ड दीप क के पास ले जाकर कहा मेरी “अखण्ड-ज्योति” यह है।